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देश की जनता भूखे पेट तड़प रही है और फर्जी राष्ट्रवाद के नाम पर देश बर्बाद हो रहा है

Vice-President Hamid Ansari’s book release

नई दिल्ली : पीएम मोदी के चहेते नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की कंपनी पर सेबी ने हेराफेरी करने के लिए 15 लाख का जुर्माना लगाया है। यह पहली बार हुआ है जब किसी सीएम पर पद पर रहते हुए जुर्माना लगा है और यह खबर बढ़िया से किसी चैनल या अखबार का हेडिंग नहीं बन पाया है। एक सीएम जिसकी कंपनी के  ऊपर हेराफेरी का आरोप सिद्ध हो चुका है वो इस समय पद पर ही नहीं बना हुआ है बल्कि गुजरात का फिर से अगला सीएम बनने वाला है।

पीएम मोदी भले ही इमानदारी का ढ़ोल पीटते आए हों लेकिन हकीकत में बीजेपी मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों पर घोटले और भ्रष्टाचार  के इतने आरोप लग रखे हैं कि अगर सही ढंग से जांच और कार्रवाई हो तो कई नेता और मंत्री नप जाएं। लेकिन एक कहावत है जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का।

लेकिन सरकार तो हमेशा से अपने आप को और अपने नेताओं को बचाने में लगी रहती है लेकिन आजादी के बाद इतने बड़े पैमाने पर मीडिया पहली बार मैनेज हो रखा है। ज्यादातर चैनल और अखबार सरकार के कदमों में लोट कर चरण पादुका में लगा हुआ है। और जो सच्चाई बयां कर रहा है उस पर देशद्रोही, पाकिस्तानी या फिर उल्टा भ्रष्टाचारी करार दे दिया जा रहा है। मीडिया का यह रवैया लोकतंत्र के लिए जितना घातक है उतना ही देश और जनता के लिए भी। सरकार इन्हीं रास्तों पर चल कर तानाशाह हो जाती है और फिर देश की जनता भूखे पेट तड़पती रहती है और राष्ट्रवाद के नाम पर देश बर्बाद हो जाता है।

आज जरा सोचिए क्या ऐसा कुछ आप महसूस कर रहे हैं? जनता भूखी मर जाती है औऱ सरकार दिल्ली में कई सौ किलो खिचड़ी बनाकर वर्ल्ड रिकोर्ड  की तैयारी करती नजर आती है। गोरखपुर के BRD जैसे हर राज्य के अस्पतालों में लोग दवाई के अभाव में, ऑक्सीजन के अभाव में, इलाज के अभाव में मर रहे हैं और देश का पीएम और राज्य का सीएम दूसरे राज्य में चुनाव प्रचार करते रहते हैं। मतलब जनता मरती है तो मरे हम तो चुनाव प्रचार करेंगे और विदेश घूमेंगे।

दिल्ली देश की राजधानी आज की तारीख में यह महानगर प्रदुषण के कारण रहने के लायक नहीं रहा है लेकिन कभी देखा है  कि पीएम या सीएम इस शहर को प्रदुषण मुक्त करने के लिए एक सात मिलकर काम करें। नहीं, केजरीवाल मोदी जी पर आरोप लगाते हैं और मोदी जी के मंत्री केजरीवाल पर। काम की जगह वहीं सड़े – गले भाषण मिलते हैं। हाल ये है कि इन सारी चीजों पर सोचो तो शर्म के साथ साथ गुस्सा भी आता है।

ऐसा नहीं है ये पहली बार हो रहा है। कांग्रेस  सरकार में 2जी, कोयला आवंटन जैसे घोटाले का आरोप लगा। केस अभी भी कोर्ट में चल रहा है। उस दौर में मनमोहन सिंह की सरकार थी और सोनिया गांधी पर्दे के पीछे से सरकार में सहयोग कर रही थी। राहुल गांधी मंत्री या पीएम बनने के बजाया पार्टी के लिए काम कर रहे थे। इन घोटालों का आरोप लगा सारे आरोपी सलाखों के पीछे गए। सीबीआई जांच सु्प्रीम कोर्ट की निगरानी में चलने लगी। 2014 के लोकसभा के चुनाव के बाद मोदी सरकार भ्रष्टाचार के खात्मे के साथ देश की गद्दी पर विराजमान हुई। सरकार बने अभी कुछ ही महीने हुए थे कि मधुकोड़ा समेत सात नेता जिनके ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप था जेल के बाहर आ गए। मारन बंधु सबूतों के अभाव में बरी हो गए। टेलीकॉम घोटले के मुख्य आरोपी सुखराम को पार्टी में शामिल करके साफ-सुथरा बना दिया। उसी तरह शारदा घोटाले के आरोपी और पूर्व रेल मंत्री मुकुल राय को भी मोदी जी ने बीजेपी में शामिल करा कर Z plus सुरक्षा दे दिया। ये पहला मामला नहीं ऐसे कई अनगिनत केस हैं जब बीजेपी भ्रष्टाचार के आरोपियों को बचाने में लगी दिखती है। अमित शाह का बेटा 50 हजार की पुंजी से 80 करोड़ कमा लेता है, अजित डोफाल के बेटे की कंपनी शक के दायरे में आ जाती है। नोटबंदी कालाधन वापस लाने के लिए था ऐसा पीएम मोदी कहते रहते हैं लेकिन क्या ऐसा हुआ? नोटबंदी कालाधन निकाले के लिए नहीं था बल्कि काला धन सफेद करने के लिए था। पीएम मोदी का हर वादा जुमला साबित हो रहा है। इसके वाबजूद ज्यादातर मीडिया सरकार से सवाल पूछने के बजाय विपक्षी दलों को घेरने में लगी रहती है। पीएम मोदी से सवाल करने के बजाय विपक्षी नेताओं को एक ही चैनल के चार – चार रिपोर्टर घेर कर सवाल पूछते नजर आते हैं। आखिर क्यों? क्या प्रदुषण मामले पर पर्यावरण मंत्री को घेर कर नहीं पूछना चाहिए था आखिर आप क्या कर रहें हैं, एनजीटी के आदेश के बावजूद सरकार पानी का छिड़काव क्यों नहीं कर रही है? क्यों प्रदुषण पर कड़े कानून नहीं बना रही है? ऐसे तमाम सवाल है जो वर्तमान सरकार से पूछे जाने चाहिए थे लेकिन इस मामले पर मीडिया ने अपनी भूमिका को संदिग्ध कर रखा है। महीने में दो-तीन चुनाव के ओपेनियन पोल आ सकते हैं, चुनाव से पहले एक ही महीने में चार-पांच चैनल अपने अपने हिसाब से सरकार बना देती है लेकिन मुख्य मुद्दे को खा जा रही है। विकास के मुद्दों के बजाय हिन्दु-मुसलमान  सबसे महत्वपूर्ण हो गया है।

जब से यह सरकार आई है हर चीज के आंकड़े फर्जी पेश होते रहे हैं। कभी नोटबंदी से संबंधित तो कभी जीएसटी से संबंधित तो कभी जॉब से संबंधित। पल पल नोकरियों के आंकड़े बदलते हैं और बढ़ते- बढ़ते लाखों से करोड़ों होते रहते हैं। जनता आती हैं इवेंट मैनेजमेंट वालों की तरह सरकार की रैलियों में आंकड़ें सुनते हैं और ख्याली पुलाव पकाकर घर जाकर  भूखे और अधभरे पेट भरकर मीठे सपनों में खो जाते हैं। अगली बार चुनाव में फिर ऐसा होता है और फिर ऐसा ही होता रहता है। जो इन रैलियों में नहीं जाता है। जनता उम्मीद पर वोट देती है और बदले में फिर उसे मिलता है एक और वादा और ख्याली पुलाव।

यह लेख मूल रूप से शिशुपाल कुमार के ब्लॉग ‘जिंदगी’ पर प्रकाशित हुआ है। (https://aamjindgi.blogspot.in/2017/11/blog-post.html)

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