Breaking News
Home / Breaking News / बचपन से ही नहीं है इस खिलाड़ी के पैर, खेलों में 4 मैडल जीत किया हरियाणा का नाम रौशन

बचपन से ही नहीं है इस खिलाड़ी के पैर, खेलों में 4 मैडल जीत किया हरियाणा का नाम रौशन

isi_1518382660

नई दिल्लीः हरियाणा खेलों में हमेशा ही आगे रहा है पर एक खिलाड़ी ऐसा है जिसने वो कर दिखाया है जो एक आम इंसान के लिए करना बेहद मुश्किल है। ये कहानी है 26 साल के इशांक की। इनकी जन्म से ही दोनों टांगे नहीं हैं। भले ही वह आम आदमी की तरह चल-फिर नहीं पाते हैं, पर उनके जैसा कारनामा कर पाना आम आदमी के लिए आसान नहीं है। पानीपत के खैल बाजार में रहने वाले इशांक ने दिव्यांगता के विरुद्ध शारीरिक और मानसिक लड़ाई खुद लड़ी। दोस्त से लेकर रिश्तेदार तक के तानों ने अंदर से मजबूत बनाया।

चार साल पहले वे इतना बीमार हुए कि 7 माह बिस्तर पर रहना पड़ा। बता दें कि इसी दौरान इशांक ने दिव्यांगों के संघर्ष की कहानियां सर्च कीं। पता चला कि वह खेल ही है, जिससे दिव्यांगता को मात दी जा सकती है। 2014 से खेलना शुरू किया। नियमित प्रैक्टिस और कठिन मेहनत की बदौलत कई खेलों को साध लिया। 10 मीटर राइफल शूटिंग में अब तक राष्ट्रीय स्तर के 4 मेडल जीत चुके हैं। हरियाणा व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम को भी लीड कर रहे हैं। रग्बी भी खेलते हैं। इशांक ने बताया कि दोस्त-रिश्तेदार सब छिप-छिप कर कहते थे- उससे कुछ नहीं होगा, दूसरों पर बोझ बनकर रहेगा, इस फीलिंग ने और ताकत दी, और पैरालिंपिक में मेडल जीतने को ही अपना लक्ष्य बना लिया।

जब से समझ आई है, यही सुन रहा था कि भगवान ने ऐसा बनाया कि जिंदगीभर दूसरों पर बोझ बनकर रहेगा। इसी फीलिंग ने मुझे अंदर से मजबूत बना दिया। सच कहूं तो 22 साल तक ही मैंने दिव्यांगता झेली है। साल 2013 में मुझे टाइफाइड बुखार हो गया। 7 महीने बिस्तर पर रहा। तब इंटरनेट पर सर्च करने लगा कि दुनिया के दिव्यांग में स्वस्थ रहने के लिए क्या-क्या करते हैं। उनकी सफलताओं की ढेरों कहानियां पढ़ीं। पता चला कि खेल ही है जिसमें दिव्यांगों ने शोहरत हासिल की। वे पांच-पांच गेम खेलते हैं। यहीं से नई राह पर निकल पड़ा। खेलने का फैसला लिया तो मां कहने लगी कि खेलो लेकिन ऐसा कि चोट न लगे। दादाजी और नानाजी ने भी सपोर्ट किया। मैं द्रोणाचार्य शूटिंग स्पोर्ट्स एकेडमी पहुंचा। ट्राइसाइकिल से वहां पहुंचते-पहुंचते पसीने से तर-बतर हो जाता।

मेरी मेहनत को देख कोच ने स्कूटी दी तो हिम्मत बढ़ गई। खर्चा निकालने के लिए प्रैक्टिस के बाद सनौली रोड पर पिताजी की डेयरी की दुकान पर काम करता हूं। मेरी भी पांच गेम खेलने की इच्छा है। फिलहाल व्हीलचेयर शूटिंग, रग्बी और बॉस्केटबॉल खेल रहा हूं। चौथे गेम के रूप में तैराकी सीख रहा हूं। पांचवें गेम का चुनाव बाद में करूंगा। पैरालिंपिक में मेडल जीतना ही मेरा लक्ष्य है।

इशांक हर शनिवार को अकेले बस से दिल्ली जाते हैं। वहां मेट्रो में सफर कर कैलाश कॉलोनी में रग्बी की प्रैक्टिस करते हैं। 20 जनवरी 2018 को हरियाणा रोडवेज के कंडक्टर ने महज इसलिए बस से उतार दिया, क्योंकि उनके पास व्हीलचेयर थी। 2016 में शूटिंग जैकेट न होने पर प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया। बास्केटबॉल टीम का कैप्टन होने के बावजूद इशांक के पास ओरिजनल व्हीलचेयर नहीं है। दिसंबर 2014 में दिल्ली में बास्केटबॉल वर्कशॉप में भाग लिया। आज हरियाणा व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम के कप्तान हैं। 10 मीटर राइफल शूटिंग में 2017 में ऑल इंडिया मावलंकर चैंपियनशिप के स्टैंडिंग वर्ग में गोल्ड मेडल जीता।

About NH@team

Check Also

WhatsApp Image 2018-05-26 at 1.40

आगामी चुनाव में प्रदेश की जनता खट्टर सरकार को दिखाएगी आईना : मनोज कुमार अग्रवाल

नई दिल्ली: हरियाणा में लगातार बढ़ रही गर्मी में जनता को पानी, बीजली की हो …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *