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सुरेश प्रभू: रेल हादसों का वो बादशाह मंत्री, जिसके राज में टिकट से लेकर इस्तीफा तक वेटिंग में रहता है

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नई दिल्ली। सुरेश प्रभू वर्तमान भारते के रेल मंत्री। वो मंत्री जिसका इस्तीफा पीएम मोदी जी भी वेटिंग में रख देते हैं। रेल हादसों का बादशाह मंत्री। इनको अगर हम उपनामों ने जोड़ने लगें तो शायद कई घंटे लग जाएंगे। लेकिन जिस तरह से लालू प्रसाद यादव को रेलवे के मुनाफे के लिए याद किया जाता है वैसे ही इन्हें रेल हादसों के लिए वर्तमान और भविष्य  दोनों में याद किया जा रहा है और किया जाएगा।

9 नवंबर 2014 को प्रभू ने रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। कुर्सी संभालते ही रेलवे के विकास के लिए बड़ी – बड़ी बातें किए। इन्हीं बातों की ओट में किराया कई गुणा बढ़ा दिया गया। कभी पब्लिक सेफ्टी के नाम पर तो कभी स्वच्छ भारत के नाम पर तो कभी प्रीमियम के नाम पर। लेकिन परिणाम हर वो आदमी जानता है जो आज रेलवे में सफर कर रहा है।

नवंबर के बाद जैसे ही दिसंबर आया, रेल हादसों की शुरूआत हो गई। सबसे पहले पूर्वा एक्सप्रेस के डब्बे पटरी से उतरे। इसके बाद तो एक के बाद एक हादसे होते गए। सिर्फ 2015 में ही 10 रेल हादसे हुए। इन 10 हादसों में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 110 लोगों की मौत हो गई जबकि सैंकड़ो घायल हो गए।

2016 में 7 रेल हादसे हुए जिसमें 150 लोगों की मौत हो गई और यहां भी सैकड़ों लोग घायल हुए। लेकिन गौर कीजिए जहां सिर्फ एक रेल दुर्घटना पर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादूर शास्त्री ने इस्तीफा दे दिया था, वहां दो साल में 17 रेल हादसे और 200 से ऊपर लोगों की मौत के बाद भी ‘ये एनडीए की सरकार है और यहां इस्तीफे नहीं होते’ की तर्ज पर प्रभू अपने पद भी बने रहे और मनमाना किराया बढ़ाते रहे।

अब आता 2017, अभी सिर्फ 8 महीने हुए है इस साल के और हादसों की संख्या 7 हो चुकी है। इन 7 होदसों में 64 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि घायलों की संख्या भी सैंकड़ों में बनी हुई है। गौर कीजिएगा ये सरकारी आंकड़े हैं। वास्तविक आंकड़ों में मौतों की संख्या बढ़ भी सकती है।

तो 3 साल में 24 हादसे हो चुके हैं जिसमें  324 लोगों की मौत हो चुकी लेकिन प्रभू साहब अभी भी रेल मंत्री बने हुए हैं। इस महीने यूपी में हुई एक रेल दुर्घटना के बाद लगातार हो रही छिछलेदारी के दवाब में आकर सुरेश प्रभू ने इस्तीफ की पेशकश कर दी। लेकिन जिस तरह से रेलवे में जनता का टिकट वेटिंग रह रहा है उसी तरह से पीएम मोदी ने प्रभू साहब के इस्तीफे को वेटिंग में डाल दिया।

आज हाल ये है कि देश में रेल दुर्घटना सामान्य सी बात हो गई है। पहले दुर्घटना स्थल पर तुरंत रेल मंत्री जायजा लेने जाते थे लेकिन आज देश भले ही डिजिटल ना हुआ हो लेकिन रेल मंत्रालय का शासन पूरी तरह से डिजिटल हो चुका है। रेलमंत्री ट्वीट करके अफसरों पर कार्रवाई करते हैं या कार्रवाई का भरोसा जनता को देते हैं और मेनस्ट्रीम मीडिया चरण वंदना करते हुए उसे महान कार्य बताते हुए, जनता के बीच में कड़ी कारवाई का संदेश पहुंचा देता है।

इसी बीच आज सुबह में फिर से एक रेल हादसा हो गया। देश की बेहतर ट्रनों में शुमार दुरंतों की चार बोगियां पटरी से उतर गई और फिर से मामला रफा – दफा करने की कोशिश जारी है।

महाराष्ट्र में मुंबई-नागपुर दुरंतो एक्सप्रेस टिटवाला के पास दुर्घटना का शिकार हो गई। इस मामले पर भारतीय रेल का कहना है कि प्रथम दृष्टया इस हादसे का कारण लैंडस्लाइड लग रहा है। दरअसल महाराष्ट्र इस समय भयंकर बारिश और बाढ़ की चपेट में है। मध्य रेलवे के मुताबिक अचानक भूस्खलन होने पर ड्राइवर ने इमर्जेंसी ब्रेक लगाई और फिर इंजन समेत 9 कोच पटरी से उतर गए।

अब हर हादसों की कुछ ना कुछ तो वजह होगी ही। चाहे वो प्राकृतिक हो या रेलवे की लापरवाही।

 

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